चीन के लिए क्यों अहम है गलवान घाटी? जाने इसके पीछे की पूरी कहानी

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चीन के लिए क्यों अहम है गलवान घाटी

आभा न्यूज़। भारत और चीनी सैनिकों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हिंसक झड़प हुई थी। गलवान घाटी में पीछे हटने के दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। झड़प में भारतीय सेना के कमांडिंग ऑफिसर समेत 20 जवान शहीद ( India 20 Soldier Martyred ) हो गए, जबकि चीन के 45 सैनिक गम्भीर रूप से हताहत बताए गए। एलएसी पर अब भी तनाव है। तीनों सेना अलर्ट पर है। बताया जा रहा है कि ITBP सेना भी कंट्रोल में आ सकती है।

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रिपोर्ट के मुताबिक मई महीनें के पहले हफ्ते से ही पूर्वी लद्दाख में चार जगहों पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने घुसपैठ की। भारतीय सेना के बात करने के बाद भी चीनी सैनिक गलवान घाटी से पीछे हटने को तैयार नहीं थे। इसी बीच दोनों देशों के बीच हिंसक झड़प हो गई, जिसमें कई जवान शहीद हो गए।

चीन के लिए क्यों अहम है गलवान घाटी?

गलवान घाटी (Galwan Valley) में सेना की चौकियों को मकसद केवल चीन को भारतीय ध्वज दिखाना था। ये चौकियां साधारण तौर पर बनाई गई थी लेकिन इस चौकी को अपने पास रखने के लिए भारत ने हमेशा चीन को टक्कर दी है। लेकिन समय के साथ गलवान घाटी दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण होती गई।

लगभग 58 साल के बाद पहली बार इस क्षेत्र में तनाव पैदा हुआ है और वह भी तब जब LAC को मुख्य रूप से परिभाषित किया गया और दोनों देशों के प्रतिद्वंद्वी द्वारा स्वीकार किया गया है। सन 1962 में चीन ने भारत पर हमला किया था। इस हमले की बड़ी वजह में से एक शिनजियांग और तिब्बत के बीच सड़क का निर्माण था। यह राजमार्ग आज G219 के नाम से जाना जाता है इस सड़क का लगभग 179 किलोमीटर हिस्सा अक्साई चीन से होकर निकलता है, जो एक भारतीय क्षेत्र है।

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चीन ने बिना भारत सरकार की सहमति से यह सड़क बनाई थी। इतना ही नहीं सड़क बनाने के बाद, चीनी दावा करने लगें कि यह क्षेत्र उन्हीं का है। सितम्बर 1962 में चीन पूर्वी लद्दाख में और अधिक क्षेत्रों पर अपना दावा करने लगा। जिसके बाद चीन और भारत के साथ लड़ाई छिड़ गई। नवम्बर 1962 में युद्ध समाप्त होने के बाद चीनियों ने अपने सितम्बर 1962 के दावे से अधिक क्षेत्र पर कब्जा कर लिया।

अब सवाल उठता है कि ऐसा क्या खास है गलवान घाटी में जिसके लिए चीन इतना उत्सुक हैं। तो इसका सीधा सा जवाब है गलवान नदी। दरअसल, गलवान नदी उच्चतम रिजलाइन अपेक्षाकृत नदी के पास से गुजरती है जो चीन को श्योर रूट के दर्रो पर चीन को हावी होने देती है। अगर चीनी गलवान नदी घाटी के पूरे हिस्से को नियंत्रित नहीं करता है तो भारत नदी घाटी का इस्तेमाल अक्साई चिन पठार पर उबरने के लिए कर सकता था इससे वहां चीनी पोजीशन के लिए खतरा पैदा हो सकता है।

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